ChatGPT से शेयरों का चुनाव होगा कितना आसान, आईटी सेक्टर में निवेश कितना फायदेमंद, जियोजित के जॉर्ज से जानिए

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Geojit Executive Director

नई दिल्लीः ब्रोकिंग इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है. एआई और अन्य टेक्नोलॉजी से इसमें आने वाले समय में और बदलाव देखने को मिल सकता है. दूसरी ओर, सोशल मीडिया के जरिए निवेशकों को प्रभावित करने को लेकर सेबी ने हाल में कदम उठाए हैं. इन सभी मुद्दों पर हमने बात की जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जोन्स जॉर्ज से. जॉर्ज से बातचीत का संपादित अंश इस प्रकार हैः

1. साल 2023 में डिजिटल ब्रोकिंग इंडस्ट्री को लेकर आपके क्या विचार हैं और डिजिटल स्पेस में जियोजित किस प्रकार ऑपरेट कर रहा है?
जॉर्जः 
मौजूदा कारोबारी माहौल में हमारे रेग्युलेटर्स और इकोसिस्टम के प्रतिभागियों की वजह से डिजिटल एक तरह से नॉर्म बन गया है. जियोजित ने भारत में दो दशक पहले ऑनलाइन ट्रेडिंग की शुरुआत कर दी थी. हम हमेशा से डिजिटल को सबसे ज्यादा अहमियत देने वाली कंपनी रहे हैं. करीब 500 फिजिकल ऑफिसेज से ऑपरेट करने के बावजूद हमारे कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का करीब 75 फीसदी ऑनलाइन होता है. डिजिटल सेवाएं भी तेजी से कमोडिटाइज हो रही हैं. ऐसे में अगर कोई ब्रोकर किसी तरह की सर्विस दे रहा है तो यह महज कुछ समय की बात होती है और पूरी इंडस्ट्री उसे फॉलो करने लग जाती है.

2. चैटजीपीटी, ओपनएआई जैसे एआई टूल्स इत्यादि के इस्तेमाल में हाल में आई वृद्धि के बाद क्या हम नई पीढ़ी की कंज्यूमर टेक्नोलॉजी में प्रवेश कर रहे हैं? यह डिजिटल ब्रोकिंग इंडस्ट्री को किस प्रकार प्रभावित करेगा?
जॉर्जः 
बड़ी संख्या में लोगों द्वारा एआई का इस्तेमाल अब भी लर्निंग फेज में है. अगर आप चैटजीपीटी या ओपनएआई को देखते हैं तो ये पाते हैं कि अभी इनमें सुधार की गुंजाइश है लेकिन इसे बिल्कुल सटीक बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए. ब्रोकिंग इंडस्ट्री में बड़े संस्थान एआई का इस्तेमाल करते हैं. अच्छे स्टॉक और अवसरों की पहचान के लिए रिसर्च करने वाले संस्थान और बड़े ट्रेडर्स इसका इस्तेमाल करते हैं. मेरा मानना है कि अगर हम इस तरह की संस्थाओं के साथ साझेदारी कर पाते हैं और इनकी सेवाएं क्लाइंट्स को दे पाते हैं तो ये ब्रोकर्स के लिए अच्छा साबित हो सकता है. मैंने कुछ अच्छे व्यक्तिगत प्रोग्रामर्स द्वारा अपना एल्गोरिद्म तैयार करने और ट्रेडिंग करने के बारे में भी सुना है.

3.इंफ्लूएंसर और यूट्यूबर्स द्वारा स्टॉक मैनिपुलेशन को लेकर सेबी द्वारा हाल में घोषित रेग्युलेशन पर आप रिटेल और थोड़े समय के इंवेस्टर्स को किस तरह की सलाह देना चाहेंगे.
जॉर्जः 
यह रेग्युलेटर्स का बहुत अच्छा कदम है. पूरे कोविड काल में मार्केट एक दिशा में आगे बढ़ रहा था. कई लोग भाग्यशाली साबित हुए और उन्होंने पैसे बनाए. इससे उन्हें लगने लगा कि उन्होंने ट्रेडिंग में महारत हासिल कर ली है और इसके बाद वे टिप्स देने लगे या एक तरह से प्रचारक बन गए. मैंने खुद ऐसे लोगों को देखा है जिनको देखकर नहीं लगता था कि वे ट्रेडिंग करते होंगे लेकिन वे यूट्यूब पर वीडियो देखकर बारीकियों को समझे बिना बड़े-बड़े दांव लगा रहे थे. मार्केट के लगातार एक दिशा में आगे बढ़ने के बावजूद सेबी के अध्ययन में ये बात सामने आई कि किस तरह बड़ी संख्या में लोग आश्चर्यजनक रूप से नुकसान उठा रहे थे. इसलिए इंफ्ल्यूएंसर्स को लेकर सेबी के रेग्युलेशन की बहुत अधिक जरूरत थी. इस दुनिया में कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलती है. दर्शकों को ये समझना होगा कि इंफ्लयूएंसर अमूमन ब्रोकर्स से कमीशन के जरिए पैसे बनाते हैं. आदर्श रूप से इंफ्ल्यूएंसर्स को ये घोषित करना चाहिए कि उन्हें कमीशन मिल रहा है या नहीं.

4. आप 2023 में भारत के आईटी सेक्टर को किस प्रकार परफॉर्म करता हुआ देख रहे हैं? बड़ी टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी और हायरिंग से जुड़े परिदृश्य को लेकर आपके क्या विचार हैं?
जॉर्जः
 चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों के आधार पर इस बात की उम्मीद की जा रही है कि बीएफएसआई इंडस्ट्री की मौजूदा चुनौतियों एवं वैश्विक सुस्ती से जुड़ी चिंताओं के चलते आईटी सेक्टर में मॉडरेट ग्रोथ देखने को मिल सकती है. हालांकि, इंडस्ट्री का आउटलुक न्यूट्रल नजर आ रहा है क्योंकि क्लाउड और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एवं हेल्दी डील हासिल करने से रेवेन्यू को लेकर एक प्रकार की विजिबलिटी नजर आ रही है. कई अमेरिकी कंपनियां पहले ही अपने वर्कफोर्स में छंटनी कर चुकी हैं और मंदी की तैयारी में लग गई हैं. ये कंपनियां भविष्य के प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ावा दे रही हैं और नेट प्रॉफिट की स्थिति बेहतर कर रही हैं. इसी बीच भारतीय आईटी कंपनियों ने ग्लोबल बिजनेस की सुस्त रफ्तार और प्रोजेक्ट पर होने वाले खर्च में देरी को देखते हुए नई नियुक्तियों की रफ्तार घटा दी है. यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए 2023-24 में स्टॉक इकट्ठा करने की रणनीति अपनाने का एक अवसर उपलब्ध कर रहा है.

5. टेक्नोलॉजी से फुल सर्विस एवं डिस्काउंट ब्रोकिंग इंडस्ट्री में किस तरह का बदलाव देखने को मिला है. दोनों इंडस्ट्रीज के लिए आगामी समय कैसा रहने वाला है?
जॉर्जः 
जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि फुल सर्विस ब्रोकर्स रिलेशनशिप विकसित करने और पर्सनलाइज सर्विसेज की पेशकश के साथ-साथ कई तरह के उत्पादों की पेशकश करते हैं. फुल सर्विसेज ब्रोकर के ग्राहक ऐसे होते हैं जिन्हें ट्रांजैक्शन के लिए एक प्लेटफॉर्म से बढ़कर किसी चीज की जरूरत होती है. वहीं डिस्काउंट ब्रोकर्स ऐसे क्लाइंट्स के लिए उपयुक्त होते हैं जो अपने निवेश और ट्रेड को खुद से मैनेज करने में सक्षम होते हैं. कुल मिलाकर दोनों के पास ग्रोथ की बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद हैं. आबादी के लिहाज से कैपिटल मार्केट का पेनेट्रेशन कम हुआ है.

6. 2023 में नई पीढ़ी के निवेशकों एवं पहली बार इंवेस्ट करने वालों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
जॉर्जः 
दुनिया में सबसे अहम निवेश खुद पर किया गया निवेश होता है. अपनी पर्सनल ग्रोथ पर ध्यान दीजिए. निवेश लंबी अवधि के लिए होता है. अपने रेग्युलेटेड एडवाइजर या डिस्ट्रिब्यूटर से बात कीजिए और शुरुआत एसआईपी से करिए. आप जैसे-जैसे अपने करियर में आगे बढ़ते हैं, अपने एसआईपी को बढ़ाइए और समय-समय पर उसकी समीक्षा करिए.

First published in Economic Times Hindi

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